Khilwar
Tuesday, 11, Aug 2026
Mobile:
Total Visitior : >
Today Visitior :

जब 1974 में इंदिरा ने छात्रों के आंदोलन को कुचला, जेपी मूवमेंट से कितना अलग CJP प्रदर्शन?    |    बि~हार~ में मोहन यादव का "मैजिक"    |    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया किसानों का आभार व्यक्त किया    |    भोपाल बनेगा वॉटर स्पोर्ट्स का वर्ल्ड क्लास अड्डा    |    उज्जैन में 2500 साल पुराना चमत्कारी शनि मंदिर    |    महिला विधायक की फिसली जुबान, CM की मौजूदगी में लिया PM का गलत नाम    |    राजस्थान में माता का वो मंदिर जिसे 2 जंगों में भी जीत न पाया पाकिस्तान     |    जानें बजरंग दल के बारे में    |    PM Modi: 18 राज्यों में 91 FM ट्रांसमीटर्स का उद्घाटन    |    जानिए- कैसे आप अगले साल ज्यादा से ज्यादा टैक्स पर छूट बचा सकते हैं    |    ऑनलाइन भुगतान की लागत कम करने के तरीकों पर काम कर रहा RBI    |    चीन के अखबार ने छापा रोबोट पत्रकार का पहला लेख    |    मशीनों का बढ़ता इस्तेमाल खत्म कर देगा लाखों नौकरियां: अर्थशास्त्री डीटन    |    गेहूँ उपार्जन में गड़बड़ी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करें    |    


खाने का तेल : दिल के लिए कितना अच्छा, कितना खराब

PUBLISHED : Oct 03 , 12:31 AM


वह वर्ष 1996 था जब खाने के एक तेल का विज्ञापन बड़ा लोकप्रिय हुआ था. उस विज्ञापन में जलेबी का शौकीन एक बच्चा होता था. संदेश था कि बताए गए तेल में जलेबी तली जाए.
नई दिल्ली: वह वर्ष 1996 था जब खाने के एक तेल का विज्ञापन बड़ा लोकप्रिय हुआ था. उस विज्ञापन में जलेबी का शौकीन एक बच्चा होता था. संदेश था कि बताए गए तेल में जलेबी तली जाए. लेकिन आज दो दशक बाद कोई भी तेल कंपनी तेल बेचते वक्त जिस चीज से जुड़ने से बचती है वह है तला हुआ खानपान और चाशनी में लिपटा हुआ व्यंजन. ऐसा इसलिए क्योंकि समय के साथ दिल भी बूढ़ा होता जाता है और उसका ध्यान रखना जरूरी है. यही वजह है कि आज कल खाने के सभी तेलों के साथ ‘‘ दिल के लिए अच्छा’’, ‘‘मोनोअनसेच्युरेटेड फैट ’’, ओमेगा थ्री, ‘‘कैरोटीन’’, ‘‘प्लांट स्टेरॉलस’’ जैसे शब्द उसके लेबल में जोड़ दिए जाते हैं, चाहे वह आपको समझ आएं या नहीं.

गुरुग्राम की रहने वाली प्रिशा मानडव्या ने कहा, ‘‘ इन लेबलों के बारे में कुछ भी समझ नहीं आता.’’ इसके अलावा उनके मुताबिक हर तेल के बारे में कहा जाता है कि वह दिल के लिए अच्छा है, इससे भ्रम और बढ़ जाता है.

चिकित्सकों की मानें तो तेल के बारे में चाहे कितने भी दावे किए जाएं लेकिन सभी में वसा होती है और सभी के अपने नुकसान हैं. भारत के शीर्ष हृदयरोग विशेषज्ञों में से एक डॉ. देवी शेट्टी अपने लेख ‘डाइट कम्स फर्स्ट इन मैटर्स ऑफ दी हार्ट’’ में कहते हैं कि जब बीज में से तेल निकालना ही प्रकृति के विरुद्ध है तो तेल दिल के लिए अच्छा कैसे हो सकता है.

फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल में हृदयरोग कंसल्टेंट डॉ. अमित कुमार कहते हैं, ‘‘ तेलों में मोनो सेच्युरेटेड फैटी एसिड (मूफा) और पॉली सेच्युरेटेड फैटी एसिड (पूफा) अलग-अलग मात्रा में होता है. वर्तमान में हमें जो जानकारी है उसके मुताबिक मूफा दिल के लिए अच्छा है. इसलिए जिन तेलों में मूफा की मात्रा अधिक होती है वह तेल बेहतर होते हैं. इसीलिए जैतून, सरसों, सोयाबीन, राइस ब्रान तेल, कनोला (राई) तेल और मूंगफली का तेल दिल के लिए बेहतर है. ’’ चिकित्सक कहते हैं कि अलग-अलग तेल का भिन्न तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए.

इम्पीरियल होटल के शेफ प्रेम के पोगुला ने कहा, ‘‘ तलने के लिए मूंगफली के तेल का इस्तेमाल करें. ’’ कोलेस्ट्रॉल की समस्या है तो प्लांट ऑइल का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि उनमें कोलेस्ट्रॉल नहीं होता. पौधे से निकलने वाले तेल हैं बादाम तेल, एवेकाडो सीड ऑइल, अलसी का तेल और नारियल तेल.

जब 1974 में इंदिरा न

काक्रोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के संदर्भ में 1974 के आंदोलन की खूब चर्चा हो रही है. तब और 2026 के छात्र आंदोलन में एक बड़ा फर्क है. तब इंदिरा गांधी ने छात्रों के आंदोलन को कुचलने का कुचक्र चलाया. अकेले बिहार में ही दर्जन भर से ज्यादा छात्रों की मौत हुई. इस बार सीजेपी के आंदो View more+

मुख्य समाचार

बॉलीवुड

Prev Next

Copyright © 2012
Designing & Development by